Sunday, February 21, 2010

                                        अध्याय -३


                                        मदर टेरेसा


पानी पिला ! शांतनु पानी वाले पर रौब मारते हुए कहा '' छूटे पैसे हैं'' पानी वाले
 लडके ने उसी अंदाज में दोनों शब्द फेके, शांतनु इधर उधर देखते हुए ''अबे दे दूंगा
यार - एक बात बता रूट नं ८ की बस आई'' ? ''आज मदर टेरेसा नही आई'' पानी
वाले ने गिलास में पानी भरते हुए कहा ''मदर टेरेसा'' !!! शांतनु और राघव दोनों
एक दुसरे की तरफ देखते हुए.... ''मुझे उसका असली नाम नही मालूम है''
पानी वाले ने गिलास बढ़ाते हुए कहा ''मदर टेरेसा'' हा हा हा दोनों जोर जोर से
हंसने लगे, पानी वाले ने भी हंसने में उनका साथ दिया ''आज छुटे नही है कल ले
लियो'' कह कर दोनों तेजी से गेट के अंदर चले गये I

     ''वो देख यार काली पल्सर'' राघव ने स्कूल के पार्किंग में खड़ी एक मोटरसायकल
की तरफ इशारा करते हुए कहा ''चल साले का हवा निकाल देते हैं'' शांतनु पीठ पर
से स्कूल बैग उतारते हुए कहा और बाईक के पास पहुँच गया, ''मै तो अगले टायर
में चाकू मार दूंगा'' राघव दाँत कीचते हुए कहा ''साला आज से लडकियों को लिफ्ट
देना भूल जायेगा- शांतनु.... देख यही है न वो सीट जिसपे उसने मेरी सायरा को
बिठाया था'' राघव सीट पर चाकू से आठ दस वार करते हुए कहा ''बस यार सीट
फट गया .... मेने अगले पहिये का हवा निकाल दिया तू  पिछले पहिये का निकाल
और भाग यहाँ से'' शांतनु हाथ झारते हुए कहा  '' कल से साला लड़की पटाना
तो दूर स्कूल में पढना भी छोड़ देगा''राघव पिछले टायर के पास बैठते हुए कहा,
इतने में एक चटाक की जोरदार आवाज के साथ वो  जमीन पर गिर गया I
पीठ सहलाते हुए ऊपर देखा तो उसके होश उड़ गए, सामने साइंस के टीचर वी सी
दत्ता थे,तब तक एक गार्ड भी वहाँ दौरते हुए आ पहुंचा, ''तुझे मेरी मोटरसायकल ने क्या
बिगारा था'' मि.दत्ता ने चीखते हुए पूछा, राघव जमीन पर हाथ टेकते हुए उठा और
दाई ओर शांतनु की तरफ देखा पर वो तो जैसे वहाँ से वाष्प बन कर उड़ चूका था,
''सर.. सर..... मै नहीं वो.. तो...'' चटाक... दूसरा चाटा ''सर टायर से हवा भी निकाल
दिया है'' गार्ड ने धीरे चापलूसी से कहा ''क्या नाम है तेरा ....'' सर स .. सारी सर ...
मै..'' राघव कांपते हुए मिन्नत करना चाहा ''आई से वाट इज योर नेम...'' मि दत्ता
फिर चीखे , अचानक राघव के दिमाग ने विपरीत परिस्थिति मै भी शरारती आदत  जोर
मारा ''स सर माई नेम इस जवाहर सिंह''   ''गेट आउट फ्राम दिस स्कूल'' मि दत्ता ने
गेट की तरफ इशारा करते हुए कहा, स्कूल से टन टन टन की आवाज आई
और सारे बच्चे अपने अपने क्लास की तरफ भागे I

      बाहर शांतनु राघव का इंतजार कर रहा था ''अबे यार उस बूढ़े ने कब बाइक
ले ली'' राघव हारे हुए इन्शान की तरह बैग निचे रखते हुए कहा ''१० तारीख को
उसके बेटे की शादी थी ये पल्सर उसी के दहेज मै आया होगा'' शांतनु बोला
''पर उसका बेटा तो विकलांग है और बैसाखी के सहारे चलता है'' उसने संदेह
जताते हुए कहा ''राघव ! तू समझेगा नही...  दहेज लड़का नही चाहता कभी,
उसके माँ बाप को दहेज चाहिए होता है... चल छोड़ ज्यादे तो नही लगी ...''
''ज्यादा लगी तो नही पर उसने अब तक सायद स्कूल से मेरा नाम काट
दिया होगा'' राघव ने उदास होते हुए कहा ''तो क्या उसने तेरा नाम और क्लास
भी पूछा था ???'' ''हाँ यार ... पर डरने की कोई जरूरत नही''....... राघव ४-५
सेकेण्ड के लिए चुप हो गया   मैने दत्ता को गलत नाम और क्लास बता दिया
हा हा ..... हा .....दोनो ने  एक दुसरे के हाथ पे हाथ मारा और हंसने लगा I        
                    
      
              
     



    

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