Sunday, February 7, 2010

                                                      
                                             अध्याय - २


                                        '' टिम्बर मार्केट''


हेलो - हेलो ......! फायर बिग्रेड ...! हेलो ... एक सरदार मोबाईल से ...'' ऐ साले फ्री वाले
नम्बर होंदे ही ऐसे हैं'' ......! दुबारा से ''हेलो फायर बिग्रेड'' ओह बेटरी खत्म सरदार मोबाईल
को जोर से सर से टकराते हुए कहा और सामने देखा तो उसकी आँख फटी की फटी रह
गई, ''ओए मेरे स्टोर मै भी लग गई''.... और जोर से चिल्लाते हुए आगे की तरफ दौरा.
आग धीरे -धीरे बढ़ता ही जा रहा था कुछ ही समय मै आग पुरे टिम्बर मार्केट में
फैल गया और सब कुछ धू धू कर जलने लगा.कुछ कुत्ते और ढेर सारे चूहे इधर उधर
भाग रहे थे,बहुत दूर से सायरनों  की आवाज -लकड़ी एवं कार के जलने की बदबू
माहौल को और भी भयानक बना रहा था,समूचा कीर्ति  नगर टिम्बर मार्केट तेल
की तरह जल रहा था चारो तरफ त्राहि-त्राहि मची थी,एसा लग रहा था जैसे
ईस्वर आज  ही सब कुछ करने वाले है,किसके साथ न्याय किसके साथ अन्याय,
किसको सजा किसको माफी,किसको जीवन किसको मृत्यु,इशी बीच एक पूंछ जलता
हुआ कुत्ता (शायद उसकी पूंछ किसी गाड़ी से निकले पेट्रोल मै भींग गई थी और
उसमे आग लग गई थी) कही से दौरता आया ... वो दौर दौर के उस पूंछ मै
लगी आग से पीछा छुड़ाना चाहता था वो उसपर कई बार मुंह मारा 
और मुंह जलने पर कांय -कांय की आवाज करता दूसरी तरफ भाग गया.
कुछ रुढीवादी और धार्मिक प्रवत्ति वाले लोग कुत्ते को हनुमान का रूप मानकर
शहमे खड़े हाथ जोड़ लेते थे,सायद हनुमान जी ही कुत्ते का रूप धारण कर आग
लगाये होंगे.बहुत दूर खड़े सारे दकानदार और फेक्ट्री वाले अपने -अपने मॉल
का होम होते देख रहे थे और सबके सब मोबाईल अपने कान में लगाए थे ,
कुछ लोग सुभ सुचना अपने घर में दे रहे थे तो कोई बेहद दुखद. जिसके दुकान
में आज ज्यादा माल था वो बहुत दुखी था जिसके दुकान में कम माल था वो
अभी से केल्कुलेसन लगाने लग गया था क़ि ५ लाख का माल जला है
५० लाख का क्लेम मांगूंगा २५ लाख तो मिल ही जायेगा , उन्ही दुकानदारों
में से एक अशोक मेहरा नाम का दुकानदार फोन पे बात करते करते बेहोश
होके गिर पड़ा,हमेशा क़ि तरह सबकुछ हो जाने के बाद एम्बुलेंस,पुलिस
और सबसे अंत में फायर बिग्रेड क़ि खटारा गारियाँ आई और राख को
कीचर में में तब्दील करने लगी,अब बारी थी मिडिया बालों क़ि जो दिन
भर टी वी में विज्ञापन दिखा के बोड़ हो गये थे वे लोग  उश कीचड़ में फुटबाल
खेलने लगे ''ये देखिये जली हुई लकड़ी... ये कैसी लग रही है'' एक लड़की
रिपोर्टर केमरा को दिखाते हुई बोली ऐसे जैसे वो जली लकड़ी नही बल्कि
चाँद या मंगल ग्रह से लाया हुआ कोई खास पत्थर हो, कम से कम २०-२५
न्यूज चेनल का लाइव टेलीकास्ट वैन आ गया और चारो तरफ से मार्केट
 को जाम कर दिया.उश अग्नि कांड में कुछ लोग जख्मी हुए थे और एक
आदमी क़ि मृत्यु हो गई थी,यह खबर पूरी दिल्ली में आधे घंटे में फैल
गई.आग कैसे लगी ये किसी को पता नही लगा, अगले दिन अख़बार में
बस यही छपा क़ि  मुख्य मंत्री ने अग्निकांड के जाँच के आदेश दे दिए है.             

                     
    

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