Thursday, February 23, 2012


                       तेरा स्वेत आँचल



माँ मैं जानता हूँ तू क्या सोचती है मेरे लिए,
मैं जानता हूँ तू क्या चाहती है मेरे लिए,
तेरी अस्क भींगे कपोलों को देख रही है दुनियाँ,
इश दुनियाँ के उन धक्कों से कब तक मुझे बचाएगी,
माँ कब तलक मुझे सहलाएगी I
यहाँ की अगम अपार गहराई में गोते मुझे लगाने दे,
छोर दे मुझे,जाने दे दूर मुझे जाने दे,
तू सब जानती है, जीवन का मर्म समझती है,
कब तक मुझे रोक पाएगी,
माँ कब तलक मुझे सहलाएगी I
जानता हूँ शिशु हूँ तेरा वही,
मानता हूँ मतिहीन हूँ फिर भी,
चोट सह लेने दे खा लेने दे भाले,
इश असह्य पीड़ा को कब तक भरमाएगी,
माँ कब तलक मुझे सहलाएगी I
तू जानती है धरती की भी अपनी रीत है,
जहाँ संघर्ष ही मनुज का मीत है,
रम जाने दे इन आबो हवा में,
पी लेने दे कुछ घूंट आंशुओं के,
अपनी स्वेत आँचल में कब तक मुझे छुपाएगी,
माँ कब तलक मुझे सहलाएगी I
क्या नहीं दिया तुमने तेरी ममता ने,
क्या नहीं देखा तेरे चेहरे के आईने में,
यशोदा ने पुत्र के मुंह में देखी थी संसार,
मैं तेरी हृदय में देखता हूँ गीता सार,
तेरी निर्मल आशीष के बिना क्या मुक्ति मुझे मिल पाएगी,
माँ कब तलक मुझे सहलाएगी I
माँ कब तलक मुझे सहलाएगी I

  

                                                     





Saturday, January 7, 2012

                             'इतना काम जरुरी होगा'


नव वर्ष नूतन वेला में इतना काम जरुरी होगा,
थके बूढ़े लोकपाल का चाँदी दांत जरुरी होगा,
हिन्दू - मुस्लिम कौमी वोटों का आना दाम जरुरी होगा,
आन - बान और शान सजेगा नेता सम्मान जरूरी होगा,
आरक्षण सविनय मांगों का रेल जाम जरुरी होगा,
सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप से एफ आई  आर जरुरी होगा, 
देखती जनता दूर देश से इन्कलाब जरुरी होगा,
नव वर्ष नूतन वेला में इतना काम जरुरी होगा,

सदन बहस के सरांस में जनता नादान जरुरी होगा,
भवरी केस मदेरणा को क्लीन चीट जरुरी होगा,
राजा कलमाड़ी का जेल में स्वास्थ लाभ जरुरी होगा,
आ गए प्रभु जी संकट हरने खानदानी मान जरुरी होगा,
एकला योग्य राहुल गाँधी का महिमा गान जरुरी होगा,
नव वर्ष नूतन वेला में इतना काम जरुरी होगा,

हो न हो ये सब काम पर इतना काम जरुरी होगा,
वीणा मलिक के स्वयंबर में कोई मुर्गा हलाल जरुरी होगा,
टी वी  चैनल के  टकरार में टी आर पी रेस  जरुरी होगा,  
प्रधान मंत्री के इंटरव्यू में 'छोटा सा ब्रेक' जरुरी होगा,
छैल छवीली महगाई से अपना एतराम जरुरी होगा,
नव वर्ष नूतन वेला में इतना काम जरुरी होगा,





Monday, September 5, 2011


                

              ''कुछ अरमान ऐसे ही''

      (मेरी प्रकाशित पुस्तक ''कुछ अरमान ऐसे ही'' से)


कहना था कुछ और मगर
बात अधूरी रह गई
बनते बिगड़ते दुनियां में
मंजिल अचानक खो गई,
देखता हूँ हर तरफ आतिशियों का शोर,
कल चले थे हम जहाँ से है यही वह मोड़,
चाहे आँधियों में दीप जला लो
कश्ती सम्हालो कसे भी
हमेशा ही रह जाते है
कुछ अरमान ऐसे ही,



Monday, June 6, 2011


                                                उद्दण्ड सरकार या सत्याग्रही...?


आखिर कांग्रेस ने अपना असली चेहरा एक बार फिर से देश को 
दिखा ही दिया , देश के मानस पटल से आपातकाल का चित्र 
धीरे धीरे छट  रहा था जिसे 5  जून को सरकार ने तजा कर दिया
मामला भी लगभग वही  पुरानी है जिसके लिए १९७४ में जय प्रकाश 
नारायण ने आन्दोलन किया था, सरकार वही सिर्फ चेरे नये है
लोकतान्त्रिक तरीके से चुने गये सरकार को क्या आधी रात को
शांतिमय  आन्दोलनकारियों  के खिलाफ इस तरह की कठोर एवं 
न्रिशंश करवाई करनी चाहिए  थी,सरकार के वरिष्ट मंत्री श्री कपिल
 शिब्ब्ल मिडिया के सामने बरी बेशर्मी से कह रहे हैं हमने बाबा 
रामदेव की लगभग सारी मांगे मन ली है समिति बनाने और
 करवाई का अस्वाशन उन्हें दे दिया है, देश की जनता सरकार 
से जानना चाहती है एक सन्यासी  को इतना बड़ा आन्दोलन करना ही क्यों  पड़ा, यदि सरकार ने बाबा रामदेव की सारी मांगे मान ली है तो 
ये सिद्ध होता है की कला धन , भ्रस्टाचार,नौकरशाही, लोकपाल बिल 
ये सारी समस्याएँ मौजूद है एवं बाबा की मांग जायज है, तो आज से 
पहले सरकार ने इन समस्याओं का निदान क्यों नहीं किया, आज जब
 देश की जनता जागी है तो कांग्रेस सरकार इश जनांदोलन को बलपूर्वक
कुचलना चाहती है,लोकतंत्र पर ये अघात जनता बर्दास्त नही करेगी अब 
यह आन्दोलन उस मोर पर पहुंच गया है जहाँ सरकार को समस्या से
 सामना करना परेगा या जनता के आक्रोश से       
       

                         


Friday, April 8, 2011

                                                  





                                         अन्ना जी ! देश आपके साथ है



लोकपाल बिल को स्तीत्व में आए लगभग  चार दशक 
हो चुके हैं,इश दौरान न जाने कितने बिल संसद में आए
और पास हुए पर लोकपाल विधेयक आज तक धक्के खा 
रहा है ,भारत के इतिहास में सबसे विवादास्पद बिल 
मंडल आयोग एवं डंकल प्रताव था जिसे सरकार ने 
राजनितिक हित की वजह से येन केन प्रकरेण पास करवा ही 
लिया, परन्तु लोकपाल से किसी का हित नहीं जुड़े होने के
 कारण आज तक पास नहीं हो पाया, यही कारण है 
देश आज भ्रस्टाचार की वजह से सोने की चिड़िया के जगह
कोयले की चिड़िया बन  कर रह गयी है
         नेता लोग चुनावी सभा में आज भी भ्रष्टाचार के खिलाफ 
खूब भाषण  करते हैं पर जब वक्त आता है तो हम आज देख  रहे 
की कैसे श्री अन्ना हजारे से सरकार कानून बनाने को लेकर 
झूठा तर्क वितर्क कर रही है,शर्म आनी चाहिए इश सरकार को
कैसे अपने को भ्रस्टाचार में बनाए रखने के लिए देश की जनता
 से मोल भाव कर रही है, 

राहुल गाँधी ! आप कहाँ है ?????? 

आप गरीब के घर में रोटी खाने जाते है, गरीबों के गली मोहल्ले
 में घूमते नजर आ जाते है मिडिया के साथ, युवाओं को एक जुट 
होने का अवाहन करते रहते है टीवी पर, देश को महाशक्ति 
बनाने का दावा करते है, भारत को भ्रस्टाचार मुक्त करना चाहते 
 है - देखिये दिल्ली (जन्तर - मन्तर) में वो सारे युवा, वो गरीब 
जनता , जन सेलाब आया हुआ है,  कुछ फरियाद लेकर
आपके सरकार के पास, उनकी भी सुनिए,वहां भी आप जाइये 
बहुत बड़ा वोट बैंक है वहां ,कहाँ छुपे है आप ??????. 

        
   

Thursday, January 6, 2011

                                  हाय आरक्षण

ये आरक्षण का पिसाच हमारे देश में कब तक रहेगा,
न जाने कब तक आरक्षण की आर में हम नेताओं से 
ठगे जाते रहेंगे, कभी महिला आरक्षण, कभी मुस्लिम 
कभी गुर्जर कभी ...... और न जाने क्या क्या आरक्षण 
हमे परेशान करता रहेगा, ऐसा नही हो सकता की सरकार 
इन दबे कुचले वर्ग को एक ऐसी शिक्षा प्रणाली दे जिससे वो
सशक्त और शिक्षित बने,ताकि समाज के साथ कदमताल 
मिला कर चल सके - उस उच्च वर्ग को कड़ी टक्कर देकर 
अपना हक वापस ले, पीछे के दरवाजे से किसी को लाइन
में सबसे आगे कर देने से प्रतिभाशाली के साथ अन्याय 
नही होता है ? लोग अपने बच्चों को सबसे तेज और सभ्य
बनाते है ताकि वो दुनियां से लड़ सके, बेहतर परफार्म करे 
और जहाँ जाए वहाँ से जीत के आए,लेकिन आरक्षण एक ऐसा 
उपाय है जिससे प्रतिभाशाली लोग हताश हो रहे है, अब 
तक जो हो गया सो हो गया, कम से कम अब सरकार को
चाहिए की इन आरक्षणों को समाप्त कर सभी को आगे बढ़ने का
समुचित अवसर प्रदान करे,        

Thursday, December 30, 2010

                                      ये क्या हो रहा है


इक्कीसवीं सदी का प्रथम दशक जा रहा है, तमाम घपलों घोटालों के बीच हमने 
 इशी दशक में 2020 तक  विकसित देश होने का लक्ष  रक्खा था, पर क्या सचमुच 
हमने कोई लक्ष रख्खा था ? उसे पूरा करने के लिए हमने कोई प्रयास किये.....?
जवाब नहीं में ही होगा, दरअसल हम शहरों का शहरी करण करते जा रहे हैं 
गाँव और देहातो का विकास नहीं,सरकार G D P को विकास का पैमाना मान
रही है लेकिन सच्चाई कुछ और है, इश तस्वीर को देखिये, ये एक स्कूल की तस्वीर   
  है,कौन कहेगा अगले दस सालों में हम विकसित देश बनने जा रहे है,  

राजनीती में भी नंगा नाच ही हो रहा है चाहे वो  पक्छ  हो या विपक्च्छ  सब अपनी
अपनी राजनीती  कर रहा है हाल ही में 2 G स्पेक्ट्रम घोटाले को ही ले लीजिये
NDA  जे पी सी की मांग कर रहा है और UPA जे पी सी के लिए किसी भी कीमत
पर तैयार नहीं है चाहे संसद चले या नही, दोनों पक्षों के जिद ने पुरे शीत कालीन
शत्र को हंगामे की भेंट चढ़ा दिया, दोनों में से कोई भी पार्टी देश के बारे में नहीं सोच
रही है, मैं पूछता हूँ आखिर 'जे पी सी'  की इतनी बड़ी  क्या जरूरत है की N D A अड़ा
हुआ है ,देश ने अब तक तीन 'जे पी सी' को देखा है चाहे वो बोफोर्ष का मामला हो
या हर्षद मेहता कांड, दोनों - तीनो मामले में 'जे पी सी' ने केस का क्या बिगाड़  लिया,
इश हंगामे से अच्छा एक काम नही हो सकता  की लोकसभा  अध्यक्ष दोनों पार्टी
को बुला कर  बीच का रास्ता निकलतीं और यह केस सीधा सुप्रीम कोर्ट के स्पेशल बेंच
को सौंप देती और एक अध्यादेश के द्वारा छ: महीने में फैसला सुनाने को कहती
ताकि देश को तुरंत न्याय मिल सके और दोसी को सजा, राजनीती के इश तरह के
रवैये से हम 10 साल तो क्या अगले 50 सालों  में भी विकसित नही हो सकते,
ये मेट्रो,लो फ्लोर बसों और कुकुर मुत्तों की तरह निजी  शिक्षण संस्थानों से विकास
नही होता ,देश के चहुमुखी विकास के लिए जरुरी है की सरकार कम से कम सरकारी
उद्यमों को वहाँ लगाये जो जिला अत्यंत गरीब और उपेक्षित है वहाँ सुविधा एवं साधन
उपलब्ध कराए ताकि सरकार के देखा देखी निजी कम्पनियां भी वहाँ जाए,लोगों
को अपने गृह क्षेत्र में ही रोजगार मिले ताकि शहरों की तरफ पलायन रुके,