ये धरती ये अम्बर जहाँ तक,
ये नज़ारे ये सितारे,
ये चंदा ये चितवन ,
क्या चंचल है मौसम,
छेरे उसे बादल दूर तक,
नादान तुम नादां हें हम
अनजान तुम अनजान हम,
ये झरना न नादान है,
बल खा के चलती है,
पपीहों को छेरती है ,
पागल पवन दूर तक ,
मुकुट पहना ये पर्वत,
नदियों कि कलरव,
सूरज की किरने ,
सोने के गहने,
बहती है चलती है,
गले सबसे मिलती है,
फूल हो या पत्थर,
साथ चलते रहे दूर तक,
साथ चलते रहे दूर तक ,
साथ चलते रहे दूर तक,

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