लौह की कलम हो
लौह की कलम हो रक्त की दवात हो,
चट्टान की दीवार पे भविष्य की बात हो,
उसर कोई पठार हो मै जो तेरे साथ हो,
पहार पे कमल खिले महक की बात हो,
विवेक द्रष्टिहिन हो मगर कोई कुलीन हो,
सितारे रात साथ हो अंधकार की बात हो,
अधर न कोई नाम हो काम ही काम हो,
ईश न कोई साथ दे गीता की जो बात हो,
समुद्र में उफान हो काल दंभ जवान हो,
धीर इंतजार हो- लक्ष की जो बात हो ,
कठोर मौन ब्रत हो धरा अनंत त्रश्त हो,
गंग सम वर मिले भागीरथी की बात हो.
सूर्य कोई लाल हो दिन भी कोई काल हो,
गो धूलि प्रहर रहे कालाहारी की बात हो.
लौह की कलम हो .......!

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