Tuesday, September 16, 2014

अब राष्ट्रवाद का समय

इश उपचुनाव के नतीजे  कथित हिंदुत्व वादियों के लिए एक सबक है, संप्रदाय के नाम पर अब जनता वोट नही  देती है, अच्छा होगा समय रहते ये लोग मोदी की तरह राष्ट्रवादी बन जाएं, जब से केंद्र में मोदी की सरकार बनी है, तब से लगभग हर दिन हर महीने हिंदूवादी संगठन के नेताओं के उलटे सीधे बयान आने लगे है, जिससे कई बार सरकार को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है, इन लोगों को समझना चाहिए अब वो जमाना नही रहा, जिस तरह कांग्रेस या अन्य दल अब मुसलमानों को भाजपा से डरा कर वोट नही ले सकते, उसी तरह हिन्दू नेता अब मुसलमानो या मंदिर मस्जिद के नाम पर वोट नही ले सकते, अब जनता सिर्फ विकास चाहती है, मोदी को शिखर पर बैठाने का लोगों का यही एक उद्देश था,क्योंकि लोग गुजरात के विकास और सुशासन से अवगत थे, लेकिन इन लोगों के कटु वचनो से देश में विकास और सुशासन को निश्चित ही नुकशान पहुंचेगा, अब समय है मोदीजी का सबलोग साथ दें और देश समाज को विकास के पथ पर आगे बढ़ाएं,        

Saturday, May 24, 2014

'व्यक्तिगत राजनीति'

नरेंद्र मोदी के शपथग्रहण समारोह में पड़ोसी देशों के प्रमुख को न्योता भेजे जाने पर देश में गन्दी राजनीति शुरू हो चुकी है, जयललिता श्री लंका को बुलाए जाने से खफा है ,ममता - बंगलादेश की वजह से खफा है तो कांग्रेस पाकिस्तान की वजह से,आखिर ये दल चाहते क्या हैं, दुनियां का हर मुल्क अपने पड़ोसियों से अच्छे 
सम्बन्ध चाहता है, पर हमारे यहां वही पुरानी राजनितिक रिवाज को अब भी निभाया जा रहा है जिसका शिकार देश आजादी के बाद से अब तक होता आया है 'व्यक्तिगत राजनीति' ,

Friday, February 14, 2014

बकरी की माँ कब तक खैर मनाएगी

जो बात मैंने निचे के पोस्ट में २ महीना पहले कहा था, दिल्ली विधान सभा में आज वही हुआ,
विपक्ष (भाजपा ,कांग्रेस )ने मिल कर जन लोकपाल विधेयक को सदन में पेश किये जाने से रोक दिया,
सत्ता पक्ष चाह कर भी कुछ नहीं कर सकी, क्यों कि बहुमत उसके पास नहीं बल्कि विपक्ष के पास थी,
लेकिन कोई बात नही जनता सब देख रही है 'बकरी की  माँ कब तक खैर मनाएगी' एक न एक दिन बिल जरूर पास होगा और दोषी लोग जेल जाएंगे,