Monday, September 5, 2011


                

              ''कुछ अरमान ऐसे ही''

      (मेरी प्रकाशित पुस्तक ''कुछ अरमान ऐसे ही'' से)


कहना था कुछ और मगर
बात अधूरी रह गई
बनते बिगड़ते दुनियां में
मंजिल अचानक खो गई,
देखता हूँ हर तरफ आतिशियों का शोर,
कल चले थे हम जहाँ से है यही वह मोड़,
चाहे आँधियों में दीप जला लो
कश्ती सम्हालो कसे भी
हमेशा ही रह जाते है
कुछ अरमान ऐसे ही,



Monday, June 6, 2011


                                                उद्दण्ड सरकार या सत्याग्रही...?


आखिर कांग्रेस ने अपना असली चेहरा एक बार फिर से देश को 
दिखा ही दिया , देश के मानस पटल से आपातकाल का चित्र 
धीरे धीरे छट  रहा था जिसे 5  जून को सरकार ने तजा कर दिया
मामला भी लगभग वही  पुरानी है जिसके लिए १९७४ में जय प्रकाश 
नारायण ने आन्दोलन किया था, सरकार वही सिर्फ चेरे नये है
लोकतान्त्रिक तरीके से चुने गये सरकार को क्या आधी रात को
शांतिमय  आन्दोलनकारियों  के खिलाफ इस तरह की कठोर एवं 
न्रिशंश करवाई करनी चाहिए  थी,सरकार के वरिष्ट मंत्री श्री कपिल
 शिब्ब्ल मिडिया के सामने बरी बेशर्मी से कह रहे हैं हमने बाबा 
रामदेव की लगभग सारी मांगे मन ली है समिति बनाने और
 करवाई का अस्वाशन उन्हें दे दिया है, देश की जनता सरकार 
से जानना चाहती है एक सन्यासी  को इतना बड़ा आन्दोलन करना ही क्यों  पड़ा, यदि सरकार ने बाबा रामदेव की सारी मांगे मान ली है तो 
ये सिद्ध होता है की कला धन , भ्रस्टाचार,नौकरशाही, लोकपाल बिल 
ये सारी समस्याएँ मौजूद है एवं बाबा की मांग जायज है, तो आज से 
पहले सरकार ने इन समस्याओं का निदान क्यों नहीं किया, आज जब
 देश की जनता जागी है तो कांग्रेस सरकार इश जनांदोलन को बलपूर्वक
कुचलना चाहती है,लोकतंत्र पर ये अघात जनता बर्दास्त नही करेगी अब 
यह आन्दोलन उस मोर पर पहुंच गया है जहाँ सरकार को समस्या से
 सामना करना परेगा या जनता के आक्रोश से       
       

                         


Friday, April 8, 2011

                                                  





                                         अन्ना जी ! देश आपके साथ है



लोकपाल बिल को स्तीत्व में आए लगभग  चार दशक 
हो चुके हैं,इश दौरान न जाने कितने बिल संसद में आए
और पास हुए पर लोकपाल विधेयक आज तक धक्के खा 
रहा है ,भारत के इतिहास में सबसे विवादास्पद बिल 
मंडल आयोग एवं डंकल प्रताव था जिसे सरकार ने 
राजनितिक हित की वजह से येन केन प्रकरेण पास करवा ही 
लिया, परन्तु लोकपाल से किसी का हित नहीं जुड़े होने के
 कारण आज तक पास नहीं हो पाया, यही कारण है 
देश आज भ्रस्टाचार की वजह से सोने की चिड़िया के जगह
कोयले की चिड़िया बन  कर रह गयी है
         नेता लोग चुनावी सभा में आज भी भ्रष्टाचार के खिलाफ 
खूब भाषण  करते हैं पर जब वक्त आता है तो हम आज देख  रहे 
की कैसे श्री अन्ना हजारे से सरकार कानून बनाने को लेकर 
झूठा तर्क वितर्क कर रही है,शर्म आनी चाहिए इश सरकार को
कैसे अपने को भ्रस्टाचार में बनाए रखने के लिए देश की जनता
 से मोल भाव कर रही है, 

राहुल गाँधी ! आप कहाँ है ?????? 

आप गरीब के घर में रोटी खाने जाते है, गरीबों के गली मोहल्ले
 में घूमते नजर आ जाते है मिडिया के साथ, युवाओं को एक जुट 
होने का अवाहन करते रहते है टीवी पर, देश को महाशक्ति 
बनाने का दावा करते है, भारत को भ्रस्टाचार मुक्त करना चाहते 
 है - देखिये दिल्ली (जन्तर - मन्तर) में वो सारे युवा, वो गरीब 
जनता , जन सेलाब आया हुआ है,  कुछ फरियाद लेकर
आपके सरकार के पास, उनकी भी सुनिए,वहां भी आप जाइये 
बहुत बड़ा वोट बैंक है वहां ,कहाँ छुपे है आप ??????. 

        
   

Thursday, January 6, 2011

                                  हाय आरक्षण

ये आरक्षण का पिसाच हमारे देश में कब तक रहेगा,
न जाने कब तक आरक्षण की आर में हम नेताओं से 
ठगे जाते रहेंगे, कभी महिला आरक्षण, कभी मुस्लिम 
कभी गुर्जर कभी ...... और न जाने क्या क्या आरक्षण 
हमे परेशान करता रहेगा, ऐसा नही हो सकता की सरकार 
इन दबे कुचले वर्ग को एक ऐसी शिक्षा प्रणाली दे जिससे वो
सशक्त और शिक्षित बने,ताकि समाज के साथ कदमताल 
मिला कर चल सके - उस उच्च वर्ग को कड़ी टक्कर देकर 
अपना हक वापस ले, पीछे के दरवाजे से किसी को लाइन
में सबसे आगे कर देने से प्रतिभाशाली के साथ अन्याय 
नही होता है ? लोग अपने बच्चों को सबसे तेज और सभ्य
बनाते है ताकि वो दुनियां से लड़ सके, बेहतर परफार्म करे 
और जहाँ जाए वहाँ से जीत के आए,लेकिन आरक्षण एक ऐसा 
उपाय है जिससे प्रतिभाशाली लोग हताश हो रहे है, अब 
तक जो हो गया सो हो गया, कम से कम अब सरकार को
चाहिए की इन आरक्षणों को समाप्त कर सभी को आगे बढ़ने का
समुचित अवसर प्रदान करे,