इश उपचुनाव के नतीजे कथित हिंदुत्व वादियों के लिए एक सबक है, संप्रदाय के नाम पर अब जनता वोट नही देती है, अच्छा होगा समय रहते ये लोग मोदी की तरह राष्ट्रवादी बन जाएं, जब से केंद्र में मोदी की सरकार बनी है, तब से लगभग हर दिन हर महीने हिंदूवादी संगठन के नेताओं के उलटे सीधे बयान आने लगे है, जिससे कई बार सरकार को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है, इन लोगों को समझना चाहिए अब वो जमाना नही रहा, जिस तरह कांग्रेस या अन्य दल अब मुसलमानों को भाजपा से डरा कर वोट नही ले सकते, उसी तरह हिन्दू नेता अब मुसलमानो या मंदिर मस्जिद के नाम पर वोट नही ले सकते, अब जनता सिर्फ विकास चाहती है, मोदी को शिखर पर बैठाने का लोगों का यही एक उद्देश था,क्योंकि लोग गुजरात के विकास और सुशासन से अवगत थे, लेकिन इन लोगों के कटु वचनो से देश में विकास और सुशासन को निश्चित ही नुकशान पहुंचेगा, अब समय है मोदीजी का सबलोग साथ दें और देश समाज को विकास के पथ पर आगे बढ़ाएं,
Intezaar
Tuesday, September 16, 2014
Saturday, May 24, 2014
'व्यक्तिगत राजनीति'
नरेंद्र मोदी के शपथग्रहण समारोह में पड़ोसी देशों के प्रमुख को न्योता भेजे जाने पर देश में गन्दी राजनीति शुरू हो चुकी है, जयललिता श्री लंका को बुलाए जाने से खफा है ,ममता - बंगलादेश की वजह से खफा है तो कांग्रेस पाकिस्तान की वजह से,आखिर ये दल चाहते क्या हैं, दुनियां का हर मुल्क अपने पड़ोसियों से अच्छे
सम्बन्ध चाहता है, पर हमारे यहां वही पुरानी राजनितिक रिवाज को अब भी निभाया जा रहा है जिसका शिकार देश आजादी के बाद से अब तक होता आया है 'व्यक्तिगत राजनीति' ,
Friday, February 14, 2014
बकरी की माँ कब तक खैर मनाएगी
जो बात मैंने निचे के पोस्ट में २ महीना पहले कहा था, दिल्ली विधान सभा में आज वही हुआ,
विपक्ष (भाजपा ,कांग्रेस )ने मिल कर जन लोकपाल विधेयक को सदन में पेश किये जाने से रोक दिया,
सत्ता पक्ष चाह कर भी कुछ नहीं कर सकी, क्यों कि बहुमत उसके पास नहीं बल्कि विपक्ष के पास थी,
लेकिन कोई बात नही जनता सब देख रही है 'बकरी की माँ कब तक खैर मनाएगी' एक न एक दिन बिल जरूर पास होगा और दोषी लोग जेल जाएंगे,
विपक्ष (भाजपा ,कांग्रेस )ने मिल कर जन लोकपाल विधेयक को सदन में पेश किये जाने से रोक दिया,
सत्ता पक्ष चाह कर भी कुछ नहीं कर सकी, क्यों कि बहुमत उसके पास नहीं बल्कि विपक्ष के पास थी,
लेकिन कोई बात नही जनता सब देख रही है 'बकरी की माँ कब तक खैर मनाएगी' एक न एक दिन बिल जरूर पास होगा और दोषी लोग जेल जाएंगे,
Saturday, December 14, 2013
CONG, के समर्थन से सिर्फ 'आप' कि सरकार बन सकती है,कोई BILL पास नहीं हो सकती, क्यों कि बहुमत सरकार के पास नहीं बल्कि विपक्ष BJP,CONG के पास रहेगी, CONG,BJP का गेम प्लान पब्लिक को समझना चाहिए,यह दोनों पार्टी मिल कर दिल्ली में आम आदमी पार्टी की बढ़ते जनाधार को नेस्तनाबूत करना चाहती है, दोनों में से किसी को भी जनता एवं जनता के समस्याओं कि चिंता नहीं है वो लोग सिर्फ राजनीति कर रहे है, कांग्रेस कह रही है हम unconditional support देंगे unconditional का क्या मतलब होता है क्या यह कि 'आप' सरकार के हर बिल का समर्थन करेगी, यदि हाँ तो केजरीवाल के उन 18 सवालों का लिखित में जवाब क्यों नहीं दे देते, आना कानी क्यों कर रहे है, जनता सब देख रही है दोनों पार्टी को सावधान हो जाना चाहिए, आगे लोकसभा चुनाव है,
Thursday, May 9, 2013
मित्रों आप लोगो ने सुप्रीम कोर्ट का स्टेटमेंट पढ़ा होगा,उच्त्तम न्यायालय का ये कहना की 'सी बी आई सरकार का तोता है' जो मालिक के कहे के हिसाब से ही बोलता है, यह बात कांग्रेस सरकार के लिए नीचता का उदाहरण है, हम सब जानते है की सरकार अपने सहूलियत के लिए शुरू से ही 'सी बी आई ' का दुरूपयोग करती आ रही है लेकिन कोयला आबंटन घोटाले में एक केन्द्रीय मंत्री द्वारा प्रत्यक्ष रूप से एजेंसी पर दबाव बना कर रिपोर्ट बदलवाना और वह भी वो रिपोर्ट जो सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होना था, यह अत्यंत निंदनीय और गम्भीर अपराध है,
Thursday, July 26, 2012
दोस्तों ! असम में सम्प्रदायिक हिंसा अब भी जारी है अब तक लगभग 50 लोग मारे जा चुके है और 2 लाख लोग बेघर हो चुके हैं, जो कांग्रेस की सरकार आज तक गुजरात दंगे का माला जप्ती आ रही थी उसी की नीतियों का परिणाम है यह,
कांग्रेस की गलत नीतियों और वोट बैंक की राजनीति की वजह से लगभग 1 करोड़ बंगलादेशी असम में बस चुके हैं अब परिणाम सामने है,सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है, कांग्रेस की वजह से जो हाल कश्मीर और कश्मीरियों का हुआ वही हाल पूर्वोत्तर में फिर से होने जा रहा है कश्मीरी पंडितों के तरह ही असम के मूल निवासी भी अब शरणार्थी बनने जा रहे है, गृह मंत्री के रूप में पी चिदम्बरम का इश दंगे को रोकने में क्या योगदान है यह समझ से परे है, वो ए सी रूम में बैठ कर शांति की अपील कर रहे है और वहां लोगों का घर जल रहा है,यह मामला कोई नया नहीं है समय रहते यदि कदम उठाए गये होते तो ये नौबत नहीं आती,सेना भेज देना किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता, इतना होने पर भी अब हमे उम्मीद करनी चाहिए की केंद्र सरकार अब नींद से जागेगी और ठोस समाधान निकालेगी ताकि देश में गुजरात दंगे की पुनरावृत्ति न हो,
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