Wednesday, October 10, 2012




हाँ सच में यह महत्पूर्ण खोज है, पैसे पेड़ पर नहीं तो जमीन के नीचे खदानों में तो जरुर उगते होंगे, 

Thursday, July 26, 2012

दोस्तों ! असम में सम्प्रदायिक  हिंसा अब भी जारी है अब तक लगभग 50 लोग मारे जा चुके है और 2 लाख लोग बेघर हो चुके हैं, जो कांग्रेस की सरकार आज तक गुजरात दंगे का माला जप्ती आ रही थी  उसी की नीतियों का परिणाम है यह,  
 कांग्रेस की गलत नीतियों और वोट बैंक की राजनीति की वजह से लगभग 1 करोड़ बंगलादेशी असम में  बस चुके हैं अब परिणाम सामने है,सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है, कांग्रेस की वजह से जो हाल कश्मीर और कश्मीरियों का हुआ वही हाल पूर्वोत्तर में फिर से होने जा रहा है कश्मीरी पंडितों के तरह ही असम के मूल निवासी भी अब शरणार्थी  बनने जा रहे है, गृह मंत्री के रूप में पी चिदम्बरम का इश दंगे को रोकने में क्या योगदान है यह समझ से परे है, वो  ए सी रूम में बैठ कर शांति की अपील कर रहे है और वहां लोगों का घर जल रहा है,यह मामला कोई नया नहीं है समय रहते यदि कदम उठाए गये होते तो ये नौबत नहीं आती,सेना भेज देना किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता, इतना होने पर भी अब हमे उम्मीद करनी चाहिए की केंद्र सरकार अब नींद से जागेगी और ठोस समाधान निकालेगी ताकि देश में  गुजरात दंगे की पुनरावृत्ति न हो,            

Thursday, February 23, 2012


                       तेरा स्वेत आँचल



माँ मैं जानता हूँ तू क्या सोचती है मेरे लिए,
मैं जानता हूँ तू क्या चाहती है मेरे लिए,
तेरी अस्क भींगे कपोलों को देख रही है दुनियाँ,
इश दुनियाँ के उन धक्कों से कब तक मुझे बचाएगी,
माँ कब तलक मुझे सहलाएगी I
यहाँ की अगम अपार गहराई में गोते मुझे लगाने दे,
छोर दे मुझे,जाने दे दूर मुझे जाने दे,
तू सब जानती है, जीवन का मर्म समझती है,
कब तक मुझे रोक पाएगी,
माँ कब तलक मुझे सहलाएगी I
जानता हूँ शिशु हूँ तेरा वही,
मानता हूँ मतिहीन हूँ फिर भी,
चोट सह लेने दे खा लेने दे भाले,
इश असह्य पीड़ा को कब तक भरमाएगी,
माँ कब तलक मुझे सहलाएगी I
तू जानती है धरती की भी अपनी रीत है,
जहाँ संघर्ष ही मनुज का मीत है,
रम जाने दे इन आबो हवा में,
पी लेने दे कुछ घूंट आंशुओं के,
अपनी स्वेत आँचल में कब तक मुझे छुपाएगी,
माँ कब तलक मुझे सहलाएगी I
क्या नहीं दिया तुमने तेरी ममता ने,
क्या नहीं देखा तेरे चेहरे के आईने में,
यशोदा ने पुत्र के मुंह में देखी थी संसार,
मैं तेरी हृदय में देखता हूँ गीता सार,
तेरी निर्मल आशीष के बिना क्या मुक्ति मुझे मिल पाएगी,
माँ कब तलक मुझे सहलाएगी I
माँ कब तलक मुझे सहलाएगी I

  

                                                     





Saturday, January 7, 2012

                             'इतना काम जरुरी होगा'


नव वर्ष नूतन वेला में इतना काम जरुरी होगा,
थके बूढ़े लोकपाल का चाँदी दांत जरुरी होगा,
हिन्दू - मुस्लिम कौमी वोटों का आना दाम जरुरी होगा,
आन - बान और शान सजेगा नेता सम्मान जरूरी होगा,
आरक्षण सविनय मांगों का रेल जाम जरुरी होगा,
सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप से एफ आई  आर जरुरी होगा, 
देखती जनता दूर देश से इन्कलाब जरुरी होगा,
नव वर्ष नूतन वेला में इतना काम जरुरी होगा,

सदन बहस के सरांस में जनता नादान जरुरी होगा,
भवरी केस मदेरणा को क्लीन चीट जरुरी होगा,
राजा कलमाड़ी का जेल में स्वास्थ लाभ जरुरी होगा,
आ गए प्रभु जी संकट हरने खानदानी मान जरुरी होगा,
एकला योग्य राहुल गाँधी का महिमा गान जरुरी होगा,
नव वर्ष नूतन वेला में इतना काम जरुरी होगा,

हो न हो ये सब काम पर इतना काम जरुरी होगा,
वीणा मलिक के स्वयंबर में कोई मुर्गा हलाल जरुरी होगा,
टी वी  चैनल के  टकरार में टी आर पी रेस  जरुरी होगा,  
प्रधान मंत्री के इंटरव्यू में 'छोटा सा ब्रेक' जरुरी होगा,
छैल छवीली महगाई से अपना एतराम जरुरी होगा,
नव वर्ष नूतन वेला में इतना काम जरुरी होगा,