उद्दण्ड सरकार या सत्याग्रही...?
आखिर कांग्रेस ने अपना असली चेहरा एक बार फिर से देश को
दिखा ही दिया , देश के मानस पटल से आपातकाल का चित्र
धीरे धीरे छट रहा था जिसे 5 जून को सरकार ने तजा कर दिया
मामला भी लगभग वही पुरानी है जिसके लिए १९७४ में जय प्रकाश
नारायण ने आन्दोलन किया था, सरकार वही सिर्फ चेरे नये है
लोकतान्त्रिक तरीके से चुने गये सरकार को क्या आधी रात को
शांतिमय आन्दोलनकारियों के खिलाफ इस तरह की कठोर एवं
न्रिशंश करवाई करनी चाहिए थी,सरकार के वरिष्ट मंत्री श्री कपिल
शिब्ब्ल मिडिया के सामने बरी बेशर्मी से कह रहे हैं हमने बाबा
रामदेव की लगभग सारी मांगे मन ली है समिति बनाने और
करवाई का अस्वाशन उन्हें दे दिया है, देश की जनता सरकार
से जानना चाहती है एक सन्यासी को इतना बड़ा आन्दोलन करना ही क्यों पड़ा, यदि सरकार ने बाबा रामदेव की सारी मांगे मान ली है तो
ये सिद्ध होता है की कला धन , भ्रस्टाचार,नौकरशाही, लोकपाल बिल
ये सारी समस्याएँ मौजूद है एवं बाबा की मांग जायज है, तो आज से
पहले सरकार ने इन समस्याओं का निदान क्यों नहीं किया, आज जब
देश की जनता जागी है तो कांग्रेस सरकार इश जनांदोलन को बलपूर्वक
कुचलना चाहती है,लोकतंत्र पर ये अघात जनता बर्दास्त नही करेगी अब
यह आन्दोलन उस मोर पर पहुंच गया है जहाँ सरकार को समस्या से
सामना करना परेगा या जनता के आक्रोश से

