Sunday, March 7, 2010

                                       अध्याय - ५

                                       हिम्मत

दोपहर का समय था स्कूल के सभी क्लासों में पढाई हो रही थी,साइंस के
छात्रों का आज प्रक्टिकल क्लास था, १८-२० छात्र एवं छात्राएं लेब में मौजूद थे,
टीचर मि केशव जैन बच्चों को प्रोजेक्ट के बारे में समझा रहे थे और बच्चे उनका
अनुशरण कर रहे थे,थोरी देर के बाद मि जैन बच्चों को दो - तिन ग्रुप बना कर
उनको अलग अलग काम देकर खुद चेयर पर बैठ के कुछ नोट लिखने लग गये
सारे बच्चे अपने अपने काम में लग गये, कुछ देर के बाद ही - दो लडकियों
की चीखने की आवाज आई सबने उधर देखा,उन दोनों लडकियों के कपड़ों में
आग लग चुकी थी और लेब में तेजी से धुआं भरता जा रहा था,सारे लोग चीखते
चिल्लाते वहाँ से भागने लगे,अब तक पास रखे  एल पी  जी सिलेंडर में भी आग
लग गई थी,ये सब देख कर शांतनु तेजी से खिडकियों के पर्दे को खीच कर
उन लडकियों को ढक कर आग बुझाया खिडकियों के शीशे तोरे और एक सेकेण्ड
की देर किए बगेर सिलेंडर को उठाकर बाहर खुले मैदान में फेका और फेकने
के ५ सेकेण्ड के बाद ही सिलेंडर जोरदार धमाके के साथ फट कर गया,
उसके फटते ही पास के दो बड़े - बड़े पेड़ों में आग लग गई दोनों पेड़ धू धू कर
जलने लगा ,सिलेंडर फेकने तक शांतनु के कपड़ों में भी आग लग चुकी थी
लेकिन उसे फेकते ही खुद जमीन पर लेट कर और कपड़ों को अपने से अलग कर
आग के आगोस से निकल गया था,लेकिन तब तक उसके दोनों हाथ का काफी
हिस्सा जल चूका था, जब तक एम्बुलेंस आई वो बेहोस हो गया था,
        सभी घायलों को एम्बुलेंस में डाला जा रहा था, स्कूल के सारे बच्चे मैदान
में इकठ्ठे हो गये थे, इतने में राघव भीर को चीरता हुआ शांतनु के पास आया
लेकिन जैसे ही उसकी नजर एक लम्बी और सांवली लड़की की तरफ गया- जिसकी
सिर्फ जांघ से निचे का हिस्सा ही सांवली और पहचान बता रही थी, उसको देख
कर वह फफक कर रोने लग गया और एम्बुलेंस के साथ ही हास्पिटल चला गया,
पीछे सारे बच्चे और टीचर लोग आपस में यही बात कर रहे थे की -एलेवेन्थ का
एक लड़का शांतनु ने अपनी जन पर खेल कर लोगो की जान बचाई वरना अज कम
से कम दो सौ बच्चे मारे जाते -यदि वो सिलेंडर बिल्डिंग के अंदर फट गया होता,
इतने में हास्पिटल से खबर आई की एक लड़की की मृत्यु हो गई जिसका नाम
सायरा था-और एक लड़का दो लड़की अब भी बेहोश है, स्कूल में चारो तरफ शोक
फेल गया, सबकी नजरें थोड़ी देर के लिए झुक गई I इश शोक की घड़ी में प्रिंसिपल
ने छोटा सा श्रध्धान्जली भाषण दिया और जो अब इश दुनियां में नही है उसके लिए
शांति व जो बच्चे बेहोस है उनको जल्दी ठीक होने के लिए प्रार्थना सभा का आयोजन
किया गया I
                        तू रहीम है तू ही कृष्ण है,
                       तू ही नानका तू ही ईश है,
                       तू सरस्वती तू ही कालका ,
                       तू ही महाकाल तू महाबला,
                       तू रहीम ........................I
                       हे इश  जगत के    इष्ट देव ,
                       हे देवता       हे   पवन देव ,
                       तू ही प्राण दे तू ईमान दे,
                       तू ही त्राण दे हे महान देव,
                       तू रहीम ........................I
                       सुन तू पुकार हे चित्रकार ,
                       कर उपकार हे जग के धार,
                       एक दीप दे    हे प्रकाश देव ,
                      देवों के देव    हे महान देव ,

                      तू रहीम है तू ही कृष्ण है
                      तू ही नानका तू ही ईश है I